जब जीनियस डायरेक्टर शेखर कपूर ने मिस्टर इंडिया में एक कॉक्रोच से एक्टिंग करवा ली

मिस्टर इंडिया मूवी में कॉक्रोच ने एक्टिंग में दी अनिल कपूर और श्री देवी को टक्कर

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Interesting Facts about Anil Kapoor, Sridevi and Shekhar kapoor

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जब जीनियस डायरेक्टर शेखर कपूर ने मिस्टर इंडिया में एक कॉक्रोच से एक्टिंग करवा ली एक मझा हुया डायरेक्टर किसी से भी एक्टींग करवा सकता है उससे भी जिसने कभी एक्टींग नहीं की हो । पर क्या हो जब एक डाॅयरेक्टर काॅकरोच से भी एक्टींग करवा ले।
कौन था ये जिनियस डाॅयरेक्टर ? कहां से आया था वो प्रतिभावान काॅकरोच जिसे सिल्वर सक्रीन पर आने का मौका मिला।
जी हां दोस्तो वो डाॅयरेक्टर थे शेखर कपूर और फिल्म थी मिस्टर इंडिया। मिस्टर इंडिया में श्रीदेवी एक पत्रकार है । फिल्म की शरूआत में श्रीदेवी को बच्चे बिल्कुल पसंद नहीं थे पर बाद में श्रीदेवी की दोस्ती सभी बच्चो से हो जाती है। फिल्म के इस सीन में वो अनिल कपूर के घर किरायेदार बनकर आती हैं।

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अनिल कपूर को पैसो की सख्त जरूरत थी। अनिल ने श्रीदेवी को ये गलत बता दिया था कि उनके घर में बच्चे नहीं पर इसके उल्ट घर में बच्चो की पुरी फौज थी । अब घर में आने के बाद अनिल कपूर को श्रीदेवी के सामने ये सच लाना है कि उनके घर में बच्चे ही बच्चे है।
ऐसे में फिल्म में पहली बार इन्ट्री लेते है काॅकरोच जी महाराज । अनिल और श्रीदेवी काॅकरोच से डरते है । ऐसे में अनिल कपूर श्री देवी से कहते है इनको सिर्फ बच्चे ही भगा सकतें है। फिर बच्चे आतें है और काॅकरोच को पकड़ कर कमरे से बाहर फेंकते हैं।

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इस सीन को दमदार बनाने के लिए शेखर कपूर चाहते थे कि काॅकरोच के क्लोजअप लीये जाये। यानी काॅकरोच पूर परदे पर दिखाई दे। जब अनिल कपूर ये कहें की काॅकरोच उन्हे देख रहा है तो ये लगना चाहिए की काॅकरोच सच में उन्हें घूर रहा है। लेकिन कैमरा लाईट सैट होते होते काॅकरोच भाग जाता था।
सीन के कई रिटेक हो चुके थे, काफी समय खराब हो चुका था, पर सीन ओके नहीं हो रहा था। बच्चो से ज्यादा फिल्म की युनिट काॅकरोच की पीछे भाग रहीं थी। ऐसे में डाॅयरेक्टर शेखर कपूर के दिमाग में एक आईडिया आया। उन्होने अपनी पंसदीदा वाईन मंगवाई वाईन यारी शराब। युनिट के लौग हैरानी में ये सोचने लगे कि परेशान होकर शेखर कपूर वाईन पीना चाहते है, पर शेखर कपूर ने ये वाईन काॅकरोच के लिए मंगवाई थी।

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शेखर कपूर ने वाईन काॅकरोच के चारों तरफ गिरा दी और इंतजार करने लगे। काॅकरोच बार बार इधर उधर जाता और भाग भाग कर वाईन में गिरता और वापिस आ जाता। दो चार बूंद जब काॅकरोच के अंदर गई तो काॅकरोच पूरी तरह नशे में डूब गये और शांती से एक जगह बैठ गये।
कैमरा मैन बाबा आजमी ने मौके पर चैका लगाया और काॅकरोच के सामने कैमरा लगाया लाईट आॅन की और लग गये काॅकरोच के क्लोजअप शूट करने। फिर शेखर कपूर का आईडिया कामयाब हुआ अब काॅकरोच ने सारे शाॅट शांती से दिये, और ये सीन वैसा ही शूट हुआ जैसा शेखर कपूर चाहते थे। अब आप जब मिस्टर इंडिया का ये सीन देंखे तो काॅकरोच की ये मद भरी अदाकारी को जरूर नोट करें।

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सत्य मूवी का ये सीन करते समय मनोज बाजपाई का डर के मारे हुआ बुरा हाल

मुंबई के किंग भीकू म्हात्रे को किस चीज से लगता है डर

Unknown and interesting facts from the film Satya

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सत्य मूवी का ये सीन करते समय मनोज बाजपाई का डर के मारे हुआ बुरा हाल

मुंबई का किंग कौन – भीकू म्हात्रे
एक्टिंग का किंग कौन -मनोज बाजपेयी
जी हां ये किस्सा है दिग्गज बाॅलिवुड कलाकार मनोज बाजपेयी का । आज के बड़े बड़े कलाकार उनका सामना करने से डरते है, क्योंकी अगर सीन में मनोज है तो फिर उस सीन में और कोई नजर नहीं आता बड़े से बड़े कलाकार को अपनी अदाकारी से पीछे छोड़ देते है।
उनको बाॅलिवुड में पहचान मिली फिल्म सत्या से जिसमें उन्होंने दबंग विलेन भीकू म्हात्रे का रोल किया था। अपनी अदाकारी से भीकू को अमर कर दिया, हलांकि ये एक बहुत ही खुंखार विलेन का रोल था । फिल्म के हर सीन को बड़ी आसानी से कर लिया पर एक सीन करते हुये मनोज बाजपेयी के पसीने छूट गये, डर के मारे उनका बुरा हाल हो गया। बहुत सारे रिटेक के बाद भी ये सीन ओके नहीं हुआ ।

manoj bajpai

कौन सा सीन था ये, आखिर कैसे ओ के हुया ये सीन, और क्यो इतना डर गये मनोज बाजपेयी, जानते है – मुंबई का किंग कौन – भीकू म्हात्रे
जी हां मैं इसी सीन की बात कर रहा था, ये डाॅयलोग सुनकर क्या तस्वीर दिमाब में उबरती हैं कि भीकू म्हात्रे समुन्द्र के किनारे एक पहाड़ पर खड़ा है, सारा शहर उसके सामने है, और वो अपनी बाहें फैला के बड़े दबंग अदांज में चिल्लाता है कि वो है मुंबई का किंग यानी वो मुंबई का राजा है हर कोई उससे डरता है।

लेकिन हकीकत ये है इस सीन में डर के मारे मनोज की हालत पतली हो रही थी। असल में ये डाॅयलोग मनोज को समुन्द्र के किनारे एक पहाड़ पर बिल्कुल किनारे पर आकर ये डाॅयलोग बोलना था। पहाड़ की उंचाई बहुत ज्यादा थी । लेकिन ये किसी को नहीं पता था की मनोज बाजपेयी को उंचाई से डर लगता था, उन्हें वर्टिगो था।

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जब कैमरा रोल हुआ और डाॅयलोग बोलने का वक्त आया तो मनोज डर के मारे किनारे तक जा ही नहीं पाये उनके पांव कांप रहें थे। डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा को समझ में नहीं आ रहा था कि अब करें तो क्या करें ये सीन तो शुरू ही नहीं हो रहा तो खत्म कैसे होगा। राम गोपाल वर्मा ने मनोज का डर दूर करने के लिए उनकें पांव में रस्सी बांध दी और युनिट ने उस रस्सी को पकड़ लिया तांकि उन्हे गिरने का डर ना लगे।

इतना सबकुछ करने के बाद भी मनोज बाजपेयी का डर नहीं गया कभी वो पीछे देखते, कभी पैरों की तरफ, कभी नीचे समुन्द्र को देखकर उनकी आंखे बंद हो जाती । ऐसे में हर बार वा डर के मारे डाॅयलोग भूल जातें । सीन की इतने रिटेक हो चुके थे राम गोपाल वर्मा परेशान हो चुके थे, ऐसे में उन्हे एक आईडिया आया ।

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रामगोपाल वर्मा ने मनोज बाजपेयी से कहा की इस सीन में तुम डाॅयलोग भूल रहे हो, ऐसा करो जो तुम्हारे मन में आये डाॅयलोग बोल दो सही डाॅयलोग बोलने की जरूरत नहीं है।
हम बाद में इस सीन के डाॅयलोग को डबिंग से सही कर देंगे पर अदाकरी किंग आॅफ मुंबई वाली हो और पैर कांपने नहीं चाहिए, ताकी सीन कमजोर ना लगे। ये आॅयडिया मनोज बाजपेयी को अच्छा लगा और उनमें सीन पूरा करने का हौंसला जागा।

कैमरा रोल हुआ सीन शुरू हुआ और बिल्कुल मुंबई के किंग के अंदाज में अदाकारी करते हुये सीन में एक्ट करना शुरू किया पर आप जानकर हैरान होंगी कि डाॅयलोग क्या बोले गये । मनोज ने बोला मुझे यहंा से नीचे उतारो, निकालो मुझे यहा से नहीं तो मैं यहा से गिर के मर जाउंगा पर चेहरे पर डर के भाव नहीं एक दबंग विलेन के भाव थे।

इस तरह से सीन पुरा हुआ, बाद में डबिंग में सही डाॅयलोग बोलकर ये सीन सही तरीके से एडिट किया। क्या सीन बन कर निकला सीन देखकर ऐसा ही लगता है कि मुंबई का किंग भीकू म्हात्रे ही है। ये सीन मनोज बाजपेयी की पहचान बन गया।

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कैसे मिली बिल्कुल फ्लॉप हो चुके आर. डी बर्मन को 1942 ए लव स्टोरी

RD Burman in 1942 a love story

आखिर क्यों आर डी बर्मन 1942 ए लव स्टोरी की कामयाबी का जशन नहीं बना सकें

R D Burman Biography, Life Story, Career

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कैसे मिली बिल्कुल फलाॅप हो चुके आर. डी बर्मन को 1942 ए लव स्टोरी

एक समय के सुपरहिट म्यूजिक डायरेक्टर आर. डी बर्मन जो बाॅलिवुड को एक से एक सुपरहिट हिट गाने दे चुके थे, उनके पास कोई काम नहीं था। उनका बेहद मुश्किल दौर चल रहा था, जी हां ऐसा मुश्किल वक्त हर उच्च कोटी के कलाकार की जिंदगी में आता है, एक समय तो उनके पास काम ही काम होता है और एक समय वो इतने अकेले हो जाते है की उनके पास कोई नहीं आता काम देने के लिए या मिलने के लिए ।
कैसे डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा ने आर.डी. बर्मन को चुना अपनी आने वाली फिल्म 1942 ए लव स्टोरी का म्युजिक डायरेक्टर जाने एक रोचक किस्सा। विनोद को यकीन था कि जिस मधुर संगीत की उन्हे तलाश है वो सिर्फ आर.डी.बर्मन ही दे सकते हैं।

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फिल्म का पहले गाने पार काम शुरू हुआ गाना था कुछ ना कहो कुछ भी ना कहों, लेकिन जब पहली बार इस गाने की धुन बर्मन दा ने चोपड़ा साहब को सुनाई तो वो चैंक गये, क्योंकि ये धुन विधु विनोद चोपड़ा को बिल्कुल पसंद नहीं आई । विधु विनोद चोपड़ा जो बर्मन दा की बहुत इज्जत करते थे उन्होंने बिल्कुल सपष्ट शब्दों में कहा की ये म्युजिक या धुन मेरी फिल्म के काबिल नहीं है सच कहुं बुरा मत मानना ये बिल्कुल बकवास म्युजिक है, मुझे नहीं लगता था कि आप ऐसी धुन बनायेंगे।
ऐसे में वातावरण बहुत बोझिल हो गया पुरे कमरे में थोड़ी देर के लिए सन्नाटा छा गया एक एक कर सभी साथी म्युजिशियन कमरे से बाहर चले गये।

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आर.डी जहा बैठे थे उनके ठीक उपर एस.डी.बर्मन का फोटो लगा था। विनोद उस फोटो को देख कर बोले असल में मैं उनकी तालश में हूं, और आप उनके सबसे करीब है, और आप ही है जो उनके मुकाबले का म्युजिक दे सकते हैं।

ये सुनकर आर.डी. की आखों में आंसु आ गये, और बोले मुझे सात दिन का वक्त दे दो। चोपड़ा साहब ने उन्हें ये वक्त दिया और सात दिन के बाद दुबारा धुन सुनने का समय आया। आर.डी.बर्मन ने नयी धुन सुनाना शुरू किया और ऐसी धुन बनी कि सुनसर चैपड़ा साहब मंत्र मुग्ध हो गये उनकी आखें बन्द हो गई और हाथ तारीफ में अपने आप उठ गये।
इसके बाद हर गाने की धुन एक से बड़ कर एक थी। आज भी हम 1942 ए लव स्टोरी के गाने हजारो बार सुन सकतें हैं, ऐसा म्युजिक दिया बर्मन दा ने जो अमर हो गया ।


लेकिन वाह री किस्मत अपना काम तो बर्मन दा ने पुरा किया लाजवाब म्युजिक दिया पर इसकी कामयाबी का जशन नहीं बना सके। फिल्म के रिलीज हाने से पहले ही वो ये दुनिया छोड़ चुके थे पर जाते जाते उन्हांेने ये नयाब तोहफा हम सब के लिए छोड़ दिया था। एक महान कैरियर का अंत इस तरह से हुआ शायद ये कहानी विधाता ने खुद अपने हाथों से लिखी थी।
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